सरकार

चुनाव लहर आयी, चुनाव लहर गयी, जनता को हर बार पहनाई, टोपी इक नई। नेता आया हाथ जोड़े, सुनने समस्याये नई, एक कान से सुनी, दूसरी से बात निकल गयी। "अच्छे दिन आ गए!"- उम्मीदें जागी नई, वादे किए थे हज़ार, निभाये एक भी नही। जात-पात, हिन्दू मुस्लिम- जन संख्या वोटों में बटी पर नेता... Continue Reading →

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असमंजस

कभी-कभी, बैठे-बैठे , यूँ ही खो जाता हूँ मैं। कोरी दीवार को घंटो देख, खुली आँखों से सो जाता हूँ मैं। आने वाले कल के बारे में सोच, बेवजह परेशान हो जाता हूँ मैं। बीते हुए कल की चलचित्रों को एकटक निहारता रह जाता हूँ मैं। अगर ऐसा होता, तो कैसा रहता, अगर वैसा होता,... Continue Reading →

Meditation

Despaired, I gazed into my soul. Alas! I was looking into a hole. Frightened, I became from my own. Happiness, Was just a part, not the whole. Hope, Was no where to be found. Darkness, Seemed limitless, knew no bounds. A voice, Seemed to come from inside. That voice, Asked me to follow from behind.... Continue Reading →

Reflections.

I wonder how time seemed to crawl like a caterpillar, Only to fly away later in my memories like a butterfly. No wonder all the castles I had built in my dreams, Seem to crumble away under their own weight in the sands of time. They were stunned by the façade of that monument, The... Continue Reading →

हेक्टर

भूरी, थोड़ी सफ़ेद सी, मोटी सी मटमैली सी, चंचल चितवन पायी है, हेक्टर हमारी प्यारी है। फुदकती रहती यहाँ वहां, चैन न मिलता किसी जगह, दुपहरी घनी हो जाती है तो, सो जाती मिले जहाँ छाँव घना। मछली की है बड़ी दीवानी, डब्बा खिसके, निकले वाणी, म्याऊ म्याऊ से गुंजायमान कर देती, जब तक न... Continue Reading →

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